दिवाली आज मनाते हैं ...

आओ पुनः एक दीप जला कर।

जनमानस के जीवन का अँधियारा आज मिटाते है ।।
दिवाली आज मनाते हैं ...

सूज्ञान की ज्योति प्रज्वलित कर।
इर्ष्या-द्वेष एवं लोभ-क्रोध को जड़ से आज मिटाते हैं।।
दिवाली आज मनाते हैं ...

दृढ़ आस्था के खम्भे से सत्यनिष्ठा की डोर बांध कर।
स्नेह, करुणा एंव धर्मं पताका पुनःआज फहराते हैं।।
दिवाली आज मनाते हैं ...

जन कल्याण की कामना कर ।
समस्त बड़ों के आशीर्वाद से दीवाली 'पवन' मनाते हैं।।
दिवाली आज मनाते हैं ...

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