"समाजिक रिस्तों तथा सम्बंधों के महत्व,पुराने दिनों में उनकी प्रगाढ़ता एवं पवित्रता, वर्तमान काल में उनका परिवर्तित होता स्वरुप, निरंतर घटते उनके मूल्यों, उनमें से कम होता स्नेह एवं सत्यता, इन सब बातों के पीछे के कारणों और समाधानों, आदि" विषयों पर आधारित आज के अधिकतर सोशल मिडिया में संदेश परिचालित हो रहे हैं। परन्तु यह संदेश टूटते-बिखरते रिस्तों की प्रवृत्ति पर विराम नहीं लगा पा रहे। शायद इस विषय पर पढ़ने-पढ़ाने की ज्यादा आवश्यकता नहीं है। लगभग हम सब अपने फोन पर अनलिमटेड काॅलज का पैकेज लेते हैं पर प्रयोग नहीं करते। अपना-अपना समाजिक काॅल लॅाग देखेगें तो पाएंगे कि आपकी ऑउट गोइंग लिस्ट इनकमिंग से कम मिलेगी। बस आप अपनी ऑउटगोइंग काॅलज को बड़ाने का प्रयास करें। आपको अवश्य सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। इस लाकडाउन में मैंने स्वयं इस बिधि का प्रयोग शुरु किया है। बड़ा-छोटा ऊँचा-नीचा सब भूल जाएं, संवाद द्वारा आपसी रिस्तों एवं सम्बंधों को पुनः प्रगाढ़ और मीठा बनाएं। अपने मित्रों को संवाद पर प्रेरित करने हेतु इन पंक्तियों को कृपया आगे बढ़ाएं।
नमस्कार 🙏 वंदे मातरम्
पवन कुमार शर्मा

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